पश्चिम बंगालः दोस्ती से बड़ा कोई धर्म नहीं, हिन्दू दोस्त का मुलिस्म युवक ने किया अंतिम संस्कार

धर्म के नाम हिन्दू और मुस्लिम की जंग कई सालों से चल रही है और इस जंग को फ़ैलाने वाले कुछ कट्ठर लोग है लेकिन भारत एक मात्रा ऐसा देश है जंहा हिन्दू एवं मुल्सिम वर्ग के लोगों में भले एक दूसरे के नफरत है लेकिन दोनों की एकता भी उतनी है और इसी वजह से भारत एक महान देश है.

भारत की महानता यंहा रहने वाले देशवाशियों से है. दुनिया भर दोनों धर्म में एक दूसरे को लेकर कट्टरता है फिर भारत में दोनों समुदायों के बीच में रिश्ते को डोर बहुत मजबूत है जिसे कोई भी तोड़ नहीं सकता. ऐसी ही एक घटना है दोस्ती की मिसाल आपके सामने है.

धर्म कोई भी हो लेकिन दोस्ती में कोई भी धर्म मायने नहीं रखता है और साबित किया पश्चिम बंगाल में रहने वाले रबी शेख ने. उनका एक दोस्त था जिसकी उम्र 30 बर्ष और नाम ‘मिलन दास’ जोकि प. बंगाल के बर्दवान जिले के नर्स क्वार्टर में रहता था उसकी मई 2018 में अचानक मुर्त्यु हो गई. और उसका कोई परिवार भी नहीं था.

लोगों की इस बात की चिंता थी की इसका क्रियाकर्म कौन करेगा तभी उसका बेहद करीबी दोस्त जो एक मुस्लिम था जिसका नाम रबी शेख, उसने अपने दोस्त के अंतिम संस्कार के लिए अपने कदम बढ़ाये. लोगों को ये देखकर हैरानी हुई क्योंकि रबी मुस्लिम था.

लेकिन पुरे हिन्दू रीति-रिवाज और परंपराओं के साथ रबी ने मिलान दास को अंतिम संस्कार किया और उसको मृत्यु देह की आग भी उसी ने दी फिर मिलन के क्रियाकर्म के बाद उसका श्राद भी रबी ने ही कराया.

लोगों को जब इस बात का एहसास हुआ कि दोस्ती धर्म या मजहब से बड़ी है तो उन्हें रबी सीख की बात दिल को छु गई और ये बात न्यूज़ में वायरल होने लगी और रबी की आस्था से वह हिंदू पुरोहित भी बेहद प्रभावित हैं जिन्होंने मिलन का अंतिम संस्कार करवाया था.

उन्हें भी ऐसी दोस्ती पहली कभी नहीं देखि और जब उनकी आखों के सामने ये सब होते देखा तो वो खुद को भाग्यशाली मानाने लगे क्योंकि ये दोस्ती धार्मिक कट्टरताओं पर जीत है. अपने दोस्त को खोने के बाद रबी बहुत दुःख में है लेकिन उन्होंने मीडिया के सामने अपनी दांस्ता सुनाई.

पिछले 10 सालों से दोनों करीबी दोस्त थे दोनों एक दूसरे से रोज मिलते थे शायद ही ऐसा हुआ की दोनों मिले न हो. उसका कोई परिवार नहीं था वो मुझे अपना परिवार मनाता था मुझे उसके जान के बाद उसका अंतिम संस्कार करने में बहुत कठनाई आई क्योंकि मुझे उसे हिन्दू रीतिरिवाजों के साथ विदा करना था.

मिलन की मौत 29 मई 2018 हार्ट अटैक से हुई थी मुझे मिलन ने एक दिन पहले ही अपनी दिल की बीमारी के बारे में 28 मई की रात.बात हुई थी लेकिन अगले दिन जब मैं काम से घर लौटा तो मुझे मालूम हुआ कि मिलन अब नही रहा और पुलिस ने भी उसे लावारिश बताया लेकिन मुझे ये मजूर नही हुआ क्योंकि मिलन मेरा दोस्त नही मेरा परिवार का हिस्सा था वो लावारिश नही था. और फिर मैंने उसके अंतिम संस्कार करने का फैंसला किया.