मक्का मस्जिद बम ब्लास्ट केस में रिहा हुए आरोपियों पर ओवैसी ने जताई अपनी नाराजगी

सन 2007 में हुए मक्का मस्जिद बम ब्लास्ट हुआ था जिसमे दर्जनों लोग घायल और लगभग एक दर्जन कई मौत हो गई थी और इस बम ब्लास्ट के मुख्य आरोपियों को अदालत ने बरी किया है, तो पूरे देश में ये बात आग तरह फ़ैल गई और लोगों ने अदालत के इस फैसले पर सवाल किये.क्योंकि मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत से स्वामी असीमानंद समेत सभी 5 आरोपियों को रिहा किए जाने के बाद देश में राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है.ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने NIA के द्वारा कि गई जांच पर सवाल खड़े कर दिए.

और उन्होंने कहा, ‘लोग एनआईए को एक पिंजरे का तोता कहते हैं, लेकिन मैं कहूंगा कि यह अंधा और बहरा भी है.’ यदि ये लोग आरोपी नहीं है तो असली आरोपी कौन है? लोगों को सब दिखाई देता है, बस मुँह से आवाज़ नहीं निकलती है.

ओवैसी ने कहा, जो लोग ‘मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस में जिनके परिवार के सदस्यों कई मौत हुई या कोई और नुक्सान हुआ है अगर विशेष अदालत के फैसले के खिलाफ अपील करना चाहता है तो मैं उन लोगों के साथ खड़ा हूँ उन्हें कोई भी कानूनी सहायता दिलवाने कई पूरी जिम्मेवारी मेरी रहेगी.ओवैसी ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट पर आरोप लगाते हुए कहा था कि मक्का मस्जिद विस्फोट मामले में अधिकतर गवाह जून 2014 के बाद से मुकर गए और एनआईए ने मामले को ठीक तरीके से अदालत में नहीं रखा जैसा कि उससे उम्मीद की जा रही थी या उसे राजनैतिक आकाओं ने ऐसा नहीं करने दिया.

मक्का मजिस्द में 2007 में हुए विस्फोट कांड में दक्षिणपंथी कार्यकर्ता स्वामी असीमानंद और चार अन्य को 16 अप्रैल को बरी कर दिया और कहा कि अभियोजन उनके खिलाफ मामला साबित करने में नाकाम रहा है. एनआईए की एक मेट्रोपोलिटन अदालत के फैसले के बाद असीमानंद के वकील जे. पी. शर्मा ने संवाददाताओं से कहा था, ‘अभियोजन मुकदमे का सामना करने वाले पांच आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित करने में विफल रहा. इसलिए अदालत ने उन्हें बरी कर दिया.