वीडियो: मीडिया का गला घोंटने में माहिर मोदी सरकार और एबीपी न्यूज के मालिक का डरपोक बेटा

मोदी सरकार मीडिया को दबाने और उसका गला घोंटने में माहिर है. राघव बहल और टीवी18 का नाम तो आपने सुना ही होगा. वही राघव बहल जो बहुत बड़े मीडिया उद्यमी रहे हैं लेकिन उन्होंने एक गलती कर दी उन्होंने अपना बिजनेस बढ़ाने के लिए रिलायंस समूह से ऋण ले लिया.

जिसके बाद मुकेश अंबानी के रिलायंस समूह ने उनका 4500 करोड़ रुपए का मीडिया साम्राज्य ही हड़प लिया. राघव बहल को उनके शेयर के अनुसार करीब 700 करोड़ रुपए मिले इसके बाद उन्होंने एक नया चैनल शुरू करने पर विचार किया इसके लिए उन्होंने ब्लूमबर्ग के साथ गठजोड़ कर लिया.

इसके बाद उनके संयुक्त उद्यम ब्लूमबर्ग-क्विंट को विदेशी पूंजी निवेश की मंजूरी भी प्राप्त हो गई लेकिन वह प्रसारण मंत्रालय की दर पर दो साल से एडियां घिस रहे है लेकिन सरकार उन्हें चैनल के लिए लाइसेंस उपलब्ध नहीं करा रही है. पर ऐसा हो क्यों रहा है? क्या उनका चैनल मीडिया के क्षेत्र में रिलांयस समूह को टक्कर देगा इसलिए?

लेकिन सवाल यह है कि बिना प्रतिस्पर्धा के भला कोई बाज़ार कैसे विकसित हो सकता है? क्या मोदी सरकार का यह कदम मीडिया का गला घोंटना नहीं है? वहीं दूसरी तरह एबीपी न्यूज़ को भी अरुप सरकार का डर डुबा रहा है. कुछ अर्ध-बिके बीच के पत्रकार का कहना है कि पूण्य प्रसून वाजपेयी को बाजार ने निपटा दिया है.

अब समझ में यह बात नहीं आती है कि पुरे हिंदी इलाके मे थोड़े ही समय में बहुत ज्यादा लोकप्रिय हुए शो मास्टर स्ट्रोक को लेकर कोई भला ऐसा कह सकता है. सच्चाई तो यह है कि एबीपी न्यूज़ के कर्ताधर्ता अभीक सरकार के बेटे अरूप सरकार सत्ता से डरे हुए इंसान है.

अरूप सरकार अपने डर के आगे बाजार की ताकत के खेल को नहीं समझ पा रहे है. लेकिन उनके डर ने एबीपी न्यूज़ को नुकसान हो रहा है जिसे वह समझ नहीं पा रहे है. एबीपी न्यूज़ ताजा रेटिंग में 4-5 वें नंबर पर आ चूका है और अगर इसी तरह चलता है तो वह बहुत जल्द मार्केट से बाहर ही हो जाएगा.

लेख वरिष्ठ पत्रकार अनिल सिंह की एफबी से लिया गया है.