नरेंद्र मोदी सरकार की सुप्रीम कोर्ट को चेतावनी कहा- बयानबाजी से परहेज करें सुप्रीम कोर्ट के जज

सुप्रीम कोर्ट के जजों पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने पलटवार करते हुए कहा है कि किसी एक समस्या के बहाने पूरी सरकार को नहीं कोसा जा सकता है. सरकार की तरफ से पेश अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के सामने एक मामले की सुनवाई में सरकार का पक्ष रखा.

K. K. Venugopal

उन्होंने कहा कि अक्सर जज किसी मामले की सुनवाई करते हुए सरकार की निष्क्रियता को लेकर टिप्पणी करते हैं जबकि ऐसी टिप्पणी से बचा जाना चाहिए. वेणुगोपाल ने अखबारों के हेडलाइंस दिखाते हुए कहा कि कोर्ट अक्सर किसी पहलू के एक पक्ष को देखते हुए ही ऑब्जर्वेशन सुनाता है जबकि मामले में सच्चाई कुछ और ही होती है.

उन्होंने कहा कि हम दिन पर दिन आपके ऑब्जर्वेशन पढ़ रहे हैं लेकिन कोई एक जज सभी तरह की समस्याओं के सभी पहलू नहीं जान सकता है. इस खंडपीठ में जस्टिस एस ए नजीर और जस्टिस दीपक गुप्ता भी शामिल है. अटॉर्नी जनरल ने कहा कि जब भी किसी विशेष मुद्दे को लेकर कोई जनहित याचिका जज के सामने लाता है.

जज उस पर कोई ऑर्डर पास करते हैं लेकिन यह बात समझना चाहिए कि उन आदेशों का व्यापाक असर पड़ता है जिसके कई परिणाम हो सकते हैं. उससे किसी खास वर्ग के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं उनके लिए फिर सरकार को सोचना पड़ता है. वेणुगोपाल ने कहा कि जब कोर्ट ने 2जी लाइसेंस रद्द किया था तब विदेशी निवेश लगभग खत्म सा हो गया.

इसी तरह राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगने वाली शराब की दुकानें हटाने के आदेश से न केवल आर्थिक क्षति हुई बल्कि कई लोगों की आजीविका भी ख़त्म हो गई. अटॉर्नी जनरल की बातों को सुनने के बाद जस्टिस लोकुर ने कहा कि मिस्टर अटॉर्नी हम यह स्पष्ट कर रहे हैं कि हमने हर चीज के लिये सरकार की आलोचना नहीं की है और न ही कर रहे हैं.

जस्टिस लोकुर ने कहा कि हम भी इस देश के नागरिक हैं और उन समस्याओं के बारे में अच्छे से जानते है हम केवल लोगों के अधिकारों की बात कर रहे हैं. हम लोगों के अधिकार से जुड़े अनुच्छेद 21 को यूं ही जाया होने नहीं दे सकते है. यह हमारा कर्तव्य है कि हम लोगों के अधिकारों की रक्षा करे.

आगे बोलते हुए जस्टिस लोकुर ने कहा कि आप अपने अधिकारियों को सिर्फ इतना कहें कि संसद ने जो कानून बनाया गया है उसका ठीक तरह से अनुपालन हो. जस्टिस लोकुर ने कहा कि अदालत के आदेश पर ही इस देश में ऐसे कई कार्य हुए हैं जो जनता के हित से जुड़े हुए है.

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट देश की 1,382 जेलों की अमानवीय स्थिति को लेकर दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी. इससे पहले कोर्ट ने जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों के होने पर कड़ी आपत्ति जताई थी. कोर्ट ने कहा था कि कैदियों के भी मानवाधिकार होते हैं और उन्हें जानवरों के जैसे नहीं रखा जा सकता है.

इसके लिए कोर्ट ने जेल में सुधार लाने हेतु एक कमेटी का गठन करने का सुझाव दिया था. जिस पर अटार्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट के विचार से सहमति व्यक्त करते हुआ कहा कि ऐसे ही कई अन्य क्षेत्रों में भारत अनेक समस्याओं का सामना कर रहा है.