पीएम मोदी की रवांडा यात्राः रवांडा देश को मोदी ने तोहफे में दी 200 गाय, जहां गाय खाने की परंपरा है

अफ्रीका महादीप में पूर्वी छोर पर है एक देश रवांडा। वहां मोदी जी दौरे पर जा रहे हैं। रवांडा की एक परम्परा है कि वहां के लोग गोपालक हैं, लेकिन परंपरा में ये भी शामिल है कि गाय जैसे ही दूध देना बंद कर देती है रवानडा वासी उसे मार कर खा जाते हैं।ये उस देश की संस्कृति है। हमारे भारत की संस्कृति गो रक्षा की है। प्रधानमंत्री ने सन 2014 के चुनाव में पिंक क्रान्ति को चुनाव को मुद्दा भी बनाया था।

खबर है कि मोदी जी रवांडा दौरे पर वहां के शासनाध्यक्ष को 2 सौ गायें उपहार में दे रहें है। ज़ाहिर है कि रवांडा में उन गांवों को दूध देंने के बाद उनका वध तय है। यानी कि पीएम ने वहां की परंपरा को जानते हुए भी गो माता को उन्हें उपहार में देने का फैसला किया है।

इस देश के पीएम से सवाल है कि आप बीफ के नाम पर छोटे व्यापारियों का कारोबार बंद कर कर बड़े स्लाटर हाउसों, जिनके मालिक जैनी, हिंदू वैश्य और सवर्ण हैं, को क्यो बढ़ा रहे हैं। आप रवांडा में गाय का कत्ल कराएँगे, आपकी पार्टी ले लोग राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को आगरा में बीफ खिलाएंगे। आप भारत को बीफ एक्सपोर्ट में नम्बर एक पर पहुचाने का प्रयास करेंगे, लेकिन जब गाय को मां का दर्जा देने वाला मुस्लिम मेवाती समाज का आदमी पहलू खान, रकबर खान दूध के कारोबार के लिए दुधारू पशु ले जएंगे तो उस की हत्या पर आपके लोग जश्न मनाएंगे, जयश्रीराम का नारा लगाएंगे और आप चुप रहेंगे, आखिर ये कौन सी नीति है?

प्रधानमंत्री जी आखिर आप की ये दोहरी नीति कब तक चलेगी। याद रखिये की ये जो हो रहा है उस पर आपकी चुप्पी भले ही एक चुनाव और जितवा दे, मगर ये न भूलिये की इतिहास आपको माफ न करेगा। आप याद करिये की 11वीं शताब्दी में कश्मीर के राजा हर्ष ने सत्ता के लिए सैकड़ों मंदिर तुड़वा दिया था, मगर कवि कल्हण ने उसकी करतूतों को इतिहास के पन्नों में दर्ज कर उसे हर भारतीय की नज़र में घृणित बना दिया। देश के लोग कभी नही चाहेंगे कि आप आप का नाम इतिहास के काले और घृणित पन्नों में जगह पाएं। इसलिए गोमांस और बीफ पर दोहरा मापदंड बन्द करिये। देश कभी नही चाहेगा कि हमारा लोकतांत्रिक पहरेदार इतिहास में राजा हर्ष की बराबरी करे