राफेल सौदे को शौरी ने बताया बोफोर्स से भी बड़ा घोटाला, सिन्हा और भूषण ने कहा- आजाद भारत का सबसे बड़ा घोटाला

बीजेपी के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने राफेल विमान सौदे को लेकर प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस घोटले को आजाद भारत का सबसे बड़ा घोटाला करार दिया. इस दौरान उन्होंने मोदी सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए.

अरुण शौरी ने कहा है कि फ्रांस के साथ हुए राफेल सौदे में बहुत बड़ा घोटाला हुआ है जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचा है. उन्होंने कहा कि उन्हें कल रात में अनिल अंबानी की ओर से इस मुद्दे को न उठाने के लिए चिट्ठी लिखी गई थी. शौरी ने कहा कि पीएम मोदी के दौरे के दौरान राफेल विमान की खरीद की जो डील की गई वह बिल्कुल नई डील थी.

किसी नई डील के लिए नए सिरे से टेंडर होना चाहिए था लेकिन ऐसा नही हुआ. इसके साझा घोषणापत्र में भी किसी नए उपकरण या हथियार लगाए जाने का ज़िक्र नहीं था. उन्होने कहा कि सेम कॉन्फिगरेशन के हथियार का ज़िक्र था जिसे एयरफ़ोर्स पहले टेस्ट कर अप्रूव कर चुका था.

इसका कॉन्ट्रेक्ट हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) से हटाकर अनिल अंबानी की कंपनी को दे दिया गया जिसको डिफ़ेंस का कोई अनुभव नहीं था और कंपनी 10 दिन पहले ही बनाई गई थी. उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री ने लोकसभा में सबसे बड़ा झूठ बोला.

जबकि भारत और फ्रांस के बीच हुए सिक्रेसी एग्रीमेंट में साफ लिखा है कि सिर्फ विमान की तकनीक से जुड़ी जानकारियों के लिए ये एग्रीमेंट प्रभावी होगा. रक्षा मंत्री बताएं कि अनिल अंबानी की कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट क्यों दिया, इसका जवाब देने के लिए ये एग्रीमेंट कहां से मना करता है.

इस दौरान प्रशांत भूषण ने कहा कि मोदी सरकार के राफेल डील में देश की सुरक्षा के साथ गंभीर खिलवाड़ किया गया. यूपीए सरकार के समय 36 विमानों की खरीद की बात हो रही थी लेकिन मोदी सरकार ने अचानक 120 विमानों की खरीद के लिए समझौता कर लिया.

जबकि एयरफोर्स के किसी भी अधिकारी ने 120 राफेल विमानों की जरुरत नहीं बताई है. भूषण ने कहा कि पहले सरकार की कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लि. को राफेल विमान बनाने की तकनिक मिलनी थी लेकिन अचानक डील से महज पांच महीने पहले अस्तित्व में आई अनिल अंबानी की कंपनी को फ्रांस के साथ राफेल विमान बनाने का कॉन्ट्रैक्ट मिल गया.

जबकि इस कंपनी को साधारण विमान बनाने का भी कोई अनुभव नहीं है प्रशांत भूषण ने कहा कि कंपनी बनाई ही इसलिए गई ताकि ये कॉन्ट्रैक्ट हासिल किया जा सके. वहीं यशवंत सिन्हा ने आरोप लगते हुए कहा कि नोटबंदी के बाद जो दो हजार के नोट छपवाये गये थे अब वे बाजार में जल्दी नहीं दिखते दो हजार के अधिकांश नोटों को कालेधन के रुप में जमा कर लिया गया है जिन्हें जरुरत पड़ने पर खर्च किया जाएगा.