तय्यब एर्दोगान पूरी दुनिया के मुसलमानों के खलीफा बनते जारहे हैं? देखें विडियो में दिलचस्प रिपोर्ट

तुर्की के राष्ट्रपति तय्यब एर्दोगान एक मजबूत नेता के तौर पर दुनिया भर में आने जाते है. एर्दोगान अपनी बेबाकी और निडरता के साथ पेश आते रहे है यही कारण है की उन्हें पूरी इस्लामी दुनिया हीरो मानती है. पूरी दुनिया के हर कोने के मुस्लिमों का दर्द एर्दोगान महसूस कर उनके साथ खड़े होते है.

एर्दोगान बीते 16 सालों से कभी चुनाव नहीं हरे है और वह तुर्की के 12 वें राष्ट्रपति है. एर्दोगान सेक्युलर तुर्की को इस्लामिक तुर्की की ओर अग्रसर कर रहे है और इसके लिए वह लगातार कोशिश कर रहे हैं. एर्दोगान कई बार ख़िलाफ़त-ए-उस्मानिया को फिर से कायम करने का जिक्र कर चुके है.

एर्दोगान ने हाल ही में इस्तांबुल के इमाम खतीब में तहरीर करते हुए कहा था कि अगर मुस्लिम अपने सब्र का बांध बंधे रखते है तो एक बार फिर से तुर्की साम्रज्य को स्थापित किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि मदीना में जिस तरह मुस्लिमों ने सब्र रखा और उसके बदले उन्हें अल्लाह ने मक्का फ़तेह का इमान दिया ठीक उसी तरह अभी सब्र रखो.

एर्दोगान मौजूदा समय में मुस्लिमों के सुप्रीम लीडर बन चुके है और उनके पुरी दुनिया की मुस्लिम आबादी को बहुत ही उम्मीद है और वह उन्हें उम्मीद भरी निगाहों से ही देखती है. एर्दोगान को कुछ मौलवियों द्वारा तो ख़िलाफ़त-ए-उस्मानिया का अगला ख़लीफ़ा मान भी लिया गया है.

तुर्की के इस्तांबुल शहर में 1954 में जन्में रजब तय्यब एर्दोगान राष्ट्रपति बनने से पहले इस्तांबुल मेयर और देश के प्रधानमंत्री के तौर पर भी काम कर चुके है. उन्होंने अपनी पार्टी जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी को कई चुनावों में जीत दिलाने के लिए बड़ी मेहनत की थी. जिसकी नीव उन्होंने २००१ में राखी थी.

एर्दोगान को बतौर मेयर 1998 में इस्लामिक तहरीर देने और सेक्युलर ढांचे को कमजोर करने के जुर्म में चार महीने तक की कैद में रह चुके है. एर्दोगान अपनी बातों में कई बार इजरायल और म्‍यांमार के ख़िलाफ़ अाक्रामक रवैया देखा चुके है. फिलिस्तीन और रोहिंग्या जैसे संवेदनशील मामलों पर वह हमेशा काफी सक्रिय नज़र आते हैं.