स्वामी अग्निवेश पर हमले की खबर को दबाने के लिए रचा गया मौलाना को थप्पड़ मारने का षड़यंत्र

नई दिल्ली- टेलीविज़न पर होने वाली डिबेट किसी जंग के मैदान से काम नहीं होती. आये दिन कुछ न कुछ मुद्दे को लेकर बहस गर्माती है. सोशल एक्टिविस्ट और राजनैतिक पार्टियों के प्रवक्ता चिल्ल पों मचाते हैं.

पहले तो लगता था की ये टीवी चैनलों पर दिखाई जाने वाली बहस वाकये में देशहित में होने वाले ज़रूरी मुद्दों को लेकर होती है. लेकिन अब धीरे धीरे कुछ घटनाओं से पता चलने लगा है की ये सब कुछ पहले से प्रीप्लान होता है.

जब कोई मेहमान प्रवक्ता अगर टीवी एंकर पर सवाल उठाता नज़र आता है, या सरकार के खिलाफ कुछ पोल खोलने की कोशिश करता है तो उसको टीवी एंकर बोलने ही नहीं देता. और फिर पैसे लेकर डिबेट में जाने वाला क्या ख़ाक बहस करेगा.

अभी हाल ही में एक इस तरह का नजारा देखने को मिला चैनल जी हिन्दुस्तान पर, जहाँ डिबेट के दौरान पेनेलिस्ट एक दुसरे से न केवल भिड़ गए वल्की एक दूसरे को थप्पड़ भी रसीद कर दिए.

मामला था कि बरेली की निदा खान के खिलाफ उनके ही शहर के एक इमाम साहब ने फतवा जारी किया था. जिसमे निदा खान को इस्लाम से खारिज करार दिया गया था. इमाम यहाँ भी न रुके वल्की उनके लिए कहा गया की अगर निदा खान मर जातीं हैं तो कोई भी उनके जनाजे में भी शामिल न हो.

और मुस्लिम समाज के लोगों से अपील करते नज़र आये की उनको मुसलमानों के कब्रस्तान में दफ़न करने के लिए जगह न दी जाए. इस मामले को लेकर जी हिन्दुस्तान नाम के चैनल पर बहस चल रही थी और इसी बहस में निदा खान और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनलॉ बोर्ड के सदस्य मुफ्ती एजाज अरशद कासमी, एक सुप्रिम कोर्ट की वकील फरहा फैज़ भी उपस्तिथ थे.

लाइव डिबेट विवाद को उस लेवल पर ले जाना था, जब तक मौलाना अपना आपा न खो दे

अगर इस डिबेट में मौलाना पर हाथ न उठाया जाता तो शायद वो भी अपना आपा न खोता. पहले तो मौलाना एजाज अरशद कासमी और निदा खान की आपस में बहसबाजी होना शुरू हुयी और उस दौरान निदा खान ने इसी लाइव डिबेट में रोना शुरू कर दिया. ये देख सुप्रीम कोर्ट की वकील फरहा फैज़ मौलाना से जद्दोजहज करने लगी और फिर इन दोनों में तू-तू मैं-मैं शुरू हो गई.

और फिर इस डिबेट को उस लेवल तक ले जाया गया जो जिस काम के लिए पहले से इस चैनल की रणनीति बनायी गयी थी. और उसी प्लान के तहत मौलाना को इतना उकसाया गया की वो आपे से बहार हो गया. बहस इतनी ज़्यादा बढ़ चुकी थी की फरहा ने मौलाना एजाज कासमी को अपशब्द कहते हुए उनके गाल पर एक थप्पड़ जड़ दिया, जिसके बाद मौलाना ने भी अपना आपा खो दिया और फिर उसका भी हाथ फरहा पर उठ गया.

मौलाना का सोशल मीडिया में उड़ रहा है मज़ाक

इस घटना के बाद से इस मौलाना को जी भरकर सभी मुसलमान समेत दुसरे लोग भी कोस रहे हैं. वही कुछ ट्रोल करने वाले जम कर मज़े ले रहे हैं. वाकई में इन टीवी डिबेट चैनलों ने बाइक हुए, किराय के मौलानाओं और मुस्लिम धर्मगुरुओं को चाँद पेसे का लालच देकर जो मुसलमानों का मज़ाक बनाया है वो निंदनीय और बेहद शर्मनाक है.

स्वामी अग्निवेश पर हमले की शर्मनाक ख़बर को इस तरह से दबाया गया, जिससे लोगों में सरकार के लिए नफरत पैदा न हो

मौलाना के हाथ उठाने के बाद सारे दिन से कुछ ही चैनलों पर चल रही स्वामी अग्निवेश को पीटने की खबर दब गयी और मीडिया के लिए सबसे बड़ी खबर का मुद्दा ये बन गया. इस बिकाऊ मौलाना की कड़ी निंदा की जाने लगी. और तमाम मुस्लिम भी इस मौलाना को कोसते हुए नज़र आये.

जब देवबंद ने फरमान जारी कर दिया था की कोई भी मौलाना टीवी चैनलों पर होने वाली बहस में न जाए तो ये लोग फिर बार-बार अपनी फजीते करवाने के लिए क्यों जाते हैं. और ये पैसे का लालची मौलाना दरअसल में मीडिया के बनाये जाल में फंस गया और उसका नतीजा ये हुआ की इसको जेल की हवा खानी पडी.

मीडिया का प्लान कामयाब हुआ और सरकार की नाकामी को दिखाने वाली स्वामी अग्निवेश पर हमले की खबर और बहस जो कल शाम न्यूज़ चैनलों मेंदिखना थी वो न हो सकी. क्योंकी वो सब मसरूफ थे. मुस्लिम समाज के खिलाफ भारत की आम जनता में नफरत पैदा करने और दाड़ी वाले मौलानाओं को बदनाम करने में.

और ऐसा इसीलिए अंदाजा लगाया जा रहा है कि आप गौर कीजिये पिछले कुछ सालों की उन घटनाओं का जब भी सरकार किसी मुद्दे पर फसती हुयी नज़र आती है, तब उसके अगले दिन कोई न कोई कांड ऐसा हो जाता है जो सुर्ख़ियों में आ जाता है. और फिर सरकार के खरीदे हुए ये मीडिया के पालतू उस खबर को दबाने के लिए उस कांड को मुख्य खबर के रूप में परोसते हैं.