रमज़ान से जुड़े वो झूठ, जिन्हें दुनियाभर के लोग सच मानते है

रमज़ान या रमदान उर्दू – अरबी – फ़ारसी رمضان मुस्लिम समुदाय इस महीने को पाक यानि पवित्र महीना कहते है। रमजान उल मुबारक का पाक महीना चल रहा है. दुनिया भर के मुसलमान रोज़े रख रहे हैं. इस पाक महीने में 30 दिनों तक लगातार रोज़े रखे जाते हैं. जो इस साल 2018/17 मई से शुरू होकर 15 जून तक चलने वाले हैं।

30 दिनों तक लगातार रोज़े के बाद सारि दुनिया में ईद मनाई जाती है जिसे ईद-उल-फितर कहते हैं. इस ईद-उल-फितर को मीठी ईद भी कहा जाता है. ईद के दिन नमाज से पहले गरीबों में फितरा भी बांटा जाता है. यही वजह है कि इस ईद को ईद-उल-फितर कहा जाता है.जिसमे ज़कात, सदक़ा, य फितरा एक तरह का दान होता है जिसे रोज़ेगारों को 30 रोजे पुरे होने से पहले देना होता है।

इस साल माह-ए-रमज़ान में 5 जुमे पड़ रहे हैं. पहला जुमा रमज़ान शुरू होने के अगले दिन 18 मई को था, वहीं, 15 जून को आखिरी जुमा होगा, जिसे अलविदा जुमा कहा जाता है. आखिरी जुमे के अगले दिन ही ईद मनाई जाएगी. आज हम आपको रमज़ान से जुड़े मिथक और सच के बारे में बतायेगे. जिसे बहुत ही कम लोग जानते हैं।

1- क्या आप रमज़ान के महीने में ब्रश नहीं कर सकते

सच: यह बात बिलकुल गलत है कि रमज़ान के महीने में दांतों को साफ या कुल्ला नहीं कर सकते हैं. क्योंकि रोज़ेदारो और नमाज अदा करने वालों के लिए इस्लाम में ‘सिवाक’ नाम का नियम बनाया गया है जिसमें दांतों को साफ करना बहुत ज़रूरी माना जाता है. अगर ऐसा ना किया जाए तो आप की नमाज पूरी नहीं मानी जाती है।

2- क्या हर मुसलमान को रमज़ान में रोज़े रखना जरूरी

सच: इस्लाम में ऐसा कहीं नही लिखा हुआ है कि रमज़ान के महीने में हर मुसलमान को रोज़े रखने ही हैं. जी हां, इस दौरान बीमार लोग, प्रेग्नेंट महिलाएं, बुजुर्ग और लंबा सफर कर रहे लोगों के लिए रोज़ा रखना जरुरी नहीं है. अगर वो अपनी सेहत के मुताबिक रोज़े रख सकते हैं तो रोज़ा जरूर रखे।

3- रोज़े की हालत में रोज़ेदार अपना थूक अंदर नहीं ले सकते

सच: गैर-मुस्लिम लोगों में सबसे बड़ा मिथक यही है कि रोज़े रख रहे लोग अपना थूक अंदर नहीं ले सकते. क्योंकि ऐसा माना जाता है कि रोज़े के दौरान पानी तक नहीं पिया जाता और इसी वजह से थूक भी अंदर नहीं लिया जाता है, जो कि पूरी तरह से झूठ है।

4- रोज़ेदारों के सामने खाना या पानी नहीं पीना चाहिए

सच: क्योंकि रोज़े के दौरान कुछ भी खाया-पिया नहीं जाता, इसी वजह से लोग ऐसा मानते हैं कि रोजेदारों के सामने कुछ नहीं खाना चाहिए. लेकिन यह सिर्फ मिथक है, जबकि सच यह है कि इस्लाम के मुताबिक रमज़ान के महीने को नेकियों, आत्मनियंत्रण और खुद पर संयम रखने का महीना माना जाता है मुसलमानों का रमज़ान के दौरान खुद पर इतना नियंत्रण होता है कि उनके सामने खाना खाने से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता. इसी वजह से यह बात पूरी तरह से झूठ है कि रोज़ेदारों के सामने खाना नहीं खाना चाहिए।

5- रोज़े के दौरान गलती से कुछ खाने पर रोज़े टूट जाते हैं

सच: हर धर्म में व्रत या रोज़े को ईश्वर को याद करने और खुद पर संयम के लिए रखा जाता है. अगर काम के दौरान या फिर भूल से कुछ खा लिया हो तो व्रत या रोज़े नहीं टूटता. हां, अगर जानबचकर रमज़ान में रोज़े के दौरान कुछ खा लिया जाए तब रोज़े जरूर टूट जायेगा।

6- महिलाओ के पीरियड्स के दौरान रोज़ा टूट जाते हैं

सच: ऐसा पूरी तरह से सच नहीं है. रमज़ान के महीने में ऐसा माना गया है कि महिला रोज़े के दौरान जिनते भी दिन के लिए पीरियड्स से होती है उस समय रोज़े माफ होते हैं. जितने भी दिनों के लिए रोज़े छूटते हैं उन्हें ईद के बाद भी पूरा किया जा सकता है।

7- क्या रमज़ान के दौरान बालों में तेल या फिर बदन पर इत्र खुशबु नहीं लगाना चाहिए

सच: नमाज से पहले दांतों को साफ करने यानी कुल्ला करने को अनिवार्य माना गया है. ठीक इसी तरह इस दौरान खुद को साफ रखने की भी मनाही नहीं. इसीलिए रोज़ेदार इस दौरान बालों में तेल, शैम्पू और शरीर पर इत्र भी लगा सकते हैं।