मोहसिन रजा के ड्रेस कोड फैसले पर मौलाना आमिर रशादी का करारा जवाब

यूसुफ खान: खेतासराय (जौनपुर) आपको बता दें कि कुछ दिन पहले उलेमा कौंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी ने एक बयान देते हुए ये कहा था की कि आतंकियों का कोई मजहब नही होता है. लेकिन फिर भी सरकार बेगुनाह और बेक़सूर मुस्लिम नौजवानों को आतंकी बनाने पर तुली हुई है.

आज़मगढ़ इसका गवाह है. मेरा विरोध हमेशा से सरकारी आतंकवाद के खिलाफ रहा है और ये आगे भी जारी रहेगा. में किसी भी सूरत में पीछे हटने वाला नहीं हूँ. ऐसा ही कुछ करने के लिए हरदम कौम के लिए खड़े रहनेवाले मौलाना आमिर रशादी अपने दिल की भड़ास मीडिया के सामने निकाल रहे थे.

जमदहा में एक नर्सरी (पौधशाला) का उद्धाटन करने के बाद जब वे फारिग हुए तो मीडियाकर्मियों से बात चीत के दौरान उन्होंने कहा कि सूबे में कानून व्यवस्था अस्त व्यस्त और ध्वस्त हो चुकी है. खाकी वर्दी ही लॉक अप में मामूली सी बातों पर पीट-पीट कर लोगों की हत्याएं कर रही है.

उन्होंने पुलिस की संदिघ्द भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब तक भदोही गोपीगंज के कोतवाल को क्यों नहीं बर्खास्त किया गया?

आये दिन प्रदेश में बलात्कार, अपहरण बेक़सूर लोगों की हत्या होना आम बात हो चुकी है. जहाँ देखो वहां कानून को हाथ में लेते लोग, बहु बेटियों की इज्ज़त तक महफ़ूज नहीं है अब और सीएम योगी सिर्फ एक मूकदर्शक बन कर बैठे हुएहैं.

एक सवाल के जवाब में मौलाना रशादी ने कहा कि मदरसों में कुर्ता पायजामा पर बैन लगा कर प्रदेश सरकार ने मुसलमानों की आस्था को चोट पहुंचाई है. जब कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके कैबिनेट मंत्री खुद कुर्ता पायजामा पहनते हैं.

हज मंत्री मोहसिन रजा को बड़बोलेपन बताते हुए कहा कि योगी जी को चाहिए कि अपने मंत्री,नेता और प्रधानमंत्री को आरएसएस का ड्रेस पहनने को कहे. फिर मदरसों में कुर्ता पायजामा पर बैन लगाने की बात करे. इस अवसर पर मो आरिफ खान, तल्हा रशादी, मुफ़्ती नसीम, वासिउद्दीन, सलाम, फैजी नोमानी सहित भारी संख्या में कार्यकता मौजूद थे.