वीडियो: बुलंदशहर बबाल पर अभिसार शर्मा और कोबरापोस्ट का बड़ा खुलासा, एक ऐसा सच जिससे आज तक अनजान थे लोग

नई दिल्ली/बुलंदशहर: उत्तर प्रदेश में बुलंदशहर के स्याना कोतवाली क्षेत्र में सोमवार को स्याना कोतवाली के गांव महाव में गौ$कशी के बाद जमकर बवाल हुआ। गुस्साई भीड़ ने बुलंदशहर के स्टेट हाईवे पर गो$वंशों के अवशे$ष रखकर जाम लगा दिया और वाहनों मे जमकर तोड़ फोड़ कर आगजनी की गई और पुलिस चौकी को भी फूंक दिया गया। स्याना कोतवाली के इस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की भी ह$त्या कर दी गई, जबकि गोली लगने से घायल हुआ स्थानिया युवक सुमित की मौत हो गई थी। पथराव में सीओ स्याना समेत सात पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। घटना के बाद एडीजी, आईजी और डीएम-एसएसपी मौके पर डेरा डाले हुए हैं। क्षेत्र में जबरदस्त तनाव का माहौल बना हुआ हैं।

इस घटना के बाद शाहिद इस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह के सर्विस रिवॉल्वर और उनका मोबाइल गायब पाये गए हैं। उन्मादी भीड़ में से कथित गौर$क्षक का एक वीडियो व्ही वायरल हो रहा है जिसमे वो यह कहते हुए नज़र आ रहा है की ये वही एसएचओ है कहीं 28 September 2015 को बुलंदशहर से कोई 35 किलोमीटर दूर हुए अखलाक ह$त्याकांड की ओर इशारा तो नहीं था।

कोबरापोस्ट में छपी खबर के मुताबिक इस दिन दादरी के बिसहाड़ा गाँव के अखलाक की उसी के गाँव वालों ने गो$कशी के आरोप में हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड की जांच का जिम्मा थाना जारचा में तैनात सुबोध कुमार सिंह को दिया गया था। सुबोध कुमार सिंह ने न सिर्फ गाँव में सांप्रदायिक सद्भाव कायम करने के प्रयास किए बल्कि इस हत्या में संलिप्त दस अभियुक्तों को गिरफ्तार कर केस को अपने तरीके से पहुंचाने का भी प्रयास किया था। लेकिन इस केस में जांच पूरी होने से पहले करीब चालीस दिन के भीतर ही सुबोध कुमार सिंह का तबादला कर बनारस भेज दिया गया।

अचानक यूपी पुलिस प्रशासन का यह फैसला चौंकाने वाला था आखिर क्यों बीच जांच सुबोध कुमार सिंह का तबादला कर दिया गया, उसके बाद इस मामले को राज्य पशु-चिकित्सा विभाग द्वारा जारी प्रारंभिक रिपोर्ट में मौका-ए-वारदात से जब्त किए गए मीट को मटन बताया गया और फिर मई 2016 में मथुरा फोरेंसिक साइन्स लैब द्वारा उसी मीट को गोमांस बताया गया। इस पुरे केस को मोड़ने की कोशिश शासन-प्रशासन के ओर से की गई थी।

जाहिर सी बात है सुबोध कुमार सिंह जानते थे कि ऐसा करना IPC का उल्लंघन है। अगर वो ऐसा करते तो भारतीय कानून की नज़र में वो अपराधी की सहायता करने के अपराधी बन जाते। अपने ट्रांसफर की वजह बताने के बाद सुबोध कुमार सिंह ने कोबरापोस्ट को बताया कि दादरी-स्थित पशु चिकित्साधिकारी ने किस तरह अपनी रिपोर्ट को दवाब के चलते बदल दिया था।

इन सभी खुलासों से ये स्पष्ट होता है कि इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह ने किसी दबाव में आकर अपने आदर्शों और ईमानदारी से समझौता नहीं किया। कथित गौ$रक्ष कों ने जिस तरह से एसएचओ सुबोध कुमार सिंह की दिन-दहाड़े ह$त्या की है वह अपने आप में बेहद ही शर्मनाक और चिंताजनक है। उनकी हत्या से पता चलता है कि सुप्रीम कोर्ट की हिदायतों की बावजूद गौ#रक्ष कों पर मौजूदा सरकारें कोई लगाम नहीं लगा पा रही हैं। बल्कि उनका साथ देती नज़र आ रही है।

 

जब इस मामले पर कोबरापोस्ट ने गौतमबुद्ध नगर ज़िले के तत्कालीन डीएम नागेंद्र प्रताप सिंह से फोन पर बात करने की कोशिश की लेकिन उन्होने सुबोध कुमार सिंह से जुड़े किसी भी मुद्दे पर बात करने से साफ इंकार कर दिया।

साभार: कोबरापोस्ट