असम NRC पर संसद में संग्राम छाती ठोककर बोले अमित शाह, हममें हिम्मत थी इसलिए लागू किया

असम में नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटीजंस ने अपनी दूसरी और अंतिम लिस्ट जारी की जिसमें असम में रह रहे करीब 40 लाख लोगों को भारतीय नागरिक नही मना गया है. सोमवार को जारी की गई इस लिस्ट के बाद असम के कुल नागरिकों 3.29 करोड़ में से 2.89 करोड़ लोगों को वैध पाया गया है.

एनआरसी के इस अंतिम मसौदे को लेकर बयानबजी और राजनीति भी शुरू हो गई है. इसे लेकर आरोप और बहस बजी का दौर भी शुरू हो चूका है. सड़क से लेकर संसद तक मोदी सरकार और विपक्षी दालों में इसे लेकर टकरार बनी हुई है. इसी क्रम में इस मामले को लेकर राज्यसभा में भी चर्चा की गई,

मंगलवार को राज्यसभा में एनआरसी के अंतिम मासौद पर बहस के दौरान बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कांग्रेस पर करारा हमला बोला. अमित शाह ने कहा कि असम समझौते को लागू करने की कांग्रेस के पास हिम्मत नहीं थी और बीजेपी की मोदी सरकार ने यह हिम्मत दिखाई है.

अमित शाह ने कहा कि असम के सैकड़ों युवा अवैध घुसपैठियों के मुद्दों पर शहीद हुए. पूर्व प्रधनमंत्री राजीव गांधी ने 1985 में असम अकॉर्ड लागू किया था. यह असम समझौता ही नेशनल रजिस्टर सिटीजन्स की आत्मा थी. नेशनल रजिस्टर सिटीजन्स के लिए नींव राजीव गांधी सरकार ने राखी थी.

शाह ने कहा कि कांग्रेस के शासन काल में हुए इस समझौते में प्रावधान था कि अवैध घुसपैठियों को पहचानकर उनको सिटिजन रजिस्टर से अलग कर एक नेशनल रजिस्टर बनाया जाएगा. कांग्रेस के प्रधानमंत्री ने यह समझौता तो किया लेकिन उनकी पार्टी इसे लागू करने की हिम्मत नही जुटा सकी इसलिए इसे बीजेपी सरकार ने लागू किया.

वहीँ इस मामले को लेकर कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद ने कहा कि नागरिकता साबित करने की जवाबदारी सिर्फ उन 40 लाख लोगों पर नही है सरकार पर भी है सरकार यह साबित करे की वह 40 लाख लोग भारत के नागरिक नही है. आजाद ने कहा कि किसी भी धर्म के लोगों को सरकार घुसपैठी बता कर देश से न निकले उन्हें क़ानूनी सहायता मिलनी चाहिए.