सोने की चिड़िया: मुगलकाल में भारत की अर्थव्यवस्था अमेरिका ब्रिटेन चीन जापान से ऊपर थी

हिन्दुस्तान को दुनियाभर में एक समय में सोने कि चिड़िया कहा जाता था| लेकिन समय के साथ-साथ इस सोने की चिड़िया को देश के कुछ दलाल नेताओं ने पीतल तो छोड़िये लोहे के बराबर भी नही रहने दिया| इसे हम देश का दुर्भाग्य ही कहेंगे की इस सोने की चिड़िया को सही सलामत हिफाज़त देने वाला और इसको और बुलंदियों की उड़ान पर पहुंचाने वाला शायद अब कभी आना मुश्किल है| क्या आपने ज़ेहन में कभी ख्याल आया कि हमारे देश को सोने की चिड़िया किस वजह से कहा जाता था?.

हालांकी विदेशों की नज़र हमेशा से ही भारत पर रही है. क्योंकी आज भी भारतीय बाज़ार में बेहद अपार संभावनाएं हैं जो ग्रकों का एक बड़ा बेस और किसी भी अच्छी कंपनी को अर्श से लेकर असमान तक पहुँचाने की ताक़त यहाँ का उपभोक्ता रखता है| हालांकी हम अधिकतर ठगी का शिकार ज्यादा होते हैं| व्यापारी जगत देश के लोगों की मानसिकता और उनकी दुखती राग को पहचान चुका है कि किसको कब कैसे ठगना है| नीचे पढ़ें किन लोगों की वजह से बना अपना देश सोने की चिड़िया.

India's economy in the Mughal period

खैर बाबर ने पानीपत के युद्ध में इब्राहिम खान लोदी को 1526 ईस्वी में हराकर दिल्ली में मुगल साम्राज्य की नींव रखी थी. इसलिए भारतीय अर्थव्यवस्था इस स्तर पर समृद्ध हुई कि दुनिया में 1600 ईस्वी में भारत का चौथा स्थान था. 1600 ईस्वी में जब भारत का सम्राट अकबर था.

देश की जीडीपी प्रति व्यक्ति फ्रांस जर्मनी जापान यूएसए आदि की तुलना में अधिक थी. नीदरलैंड के ग्रोनिंगेन विश्वविद्यालय के आंकड़ों के अनुसार दुनिया में भारतीय सबसे अमीर लोगों में से थे. 16 वीं शताब्दी से 18 वीं शताब्दी तक का मुगल साम्राज्य विश्व का सबसे अमीर और सबसे शक्तिशाली साम्राज्य था.

वहीँ 17 वीं शताब्दी में भारत आए फ्रांसीसी यात्री फ्रेंकोइस बर्नीर ने लिखा कि दुनिया भर से हर तिमाही में भारत को सोना और चांदी आता था. मुग़ल साम्राज्य में सड़कों नदी परिवहन समुद्री मार्गों पर कई तरह के करों को समाप्त करके व्यापार को प्रोत्साहित किया था.

भारतीय हस्तशिल्प को विकसित किया गया था. कपास के कपड़े मसाले ऊनी और रेशम के कपड़े, नमक इत्यादि जैसे निर्मित सामानों के जरिए एक संपन्न निर्यात व्यापार था. अकबर ने बहुत ही कुशल प्रणाली से व्यापार और वाणिज्य के माहौल को सुविधाजनक बनाया.

अकबर ने ईस्ट इंडिया कंपनी को मुगल साम्राज्य से व्यापार रियायतों की तलाश करने का अंत किया और अंत में इसे नियंत्रित कर दिया. बुनियादी स्मारकों में मुगलों ने निवेश किया था जो महान स्मारकों का पर्यटक ड्रॉ सालाना करोड़ों रुपये पैदा करते हैं.

मुगल शासकों ने स्थानीय कला और शिल्प में निवेश किया और भारत में पुराने और नए कौशल सेट बनाए. दिल्ली अध्याय के प्रभारी स्वपन लिडल का कहना है कि उन के नजरिये से भारत में सबसे बड़ा मुगल योगदान कला के संरक्षण के रूप में था.

फिर चाहे वह इमारत हो बुनाई और धातु-काम करने जैसी कलात्मक शिल्प या पेंटिंग जैसी ललित कलाएं उन्होंने पूर्णता के मानकों को निर्धारित किया जो दूसरों के अनुसरण के लिए एक अच्छा उदाहरण बन गया.