सखी सईया तो खूब ही कमात है, महंगाई डायन खाए जात है

देश में इस समय मंहगाई चरम पर है पेट्रोल और डीजल के दाम आसमान छू रहे है तो रसोई गैस भी पीछे नही रह रही है वह भी आम आदमी को आंखे देखा रही है. ऐसे में एक पुरानी बात याद आ गई 13 अगस्त 2010 को एक बॉलीवुड फिल्म पिपली लाइव रिलीज हुई थी. यह फिल्म एक गरीब किसान के जीवन पर थी, यह गरीब किसान गरीबी मंहगाई और कर्ज के थक हार कर आत्महत्या करने का फैसला करता है. उसे लेकर काफी राजनीति होती है लेकिन नत्था के हालातों में कोई सुधार नही होता है.

देश की जनता मंहगाई की मार झेल रही

आज के समय में देश की जनता का भी कुछ ऐसा ही हाल बेहाल है, देश की जनता मंहगाई की मार झेल रही है. पीपली लाइव फिल्म में एक गीत था सखी सईया तो खूब ही कमात है, महंगाई डायन खाए जात है. मोदी राज में यह गाना जनता के हाल को बखूबी बता रहा है.

बीजेपी ने इस गाने को बार बार दोहराया

यह गाना साल 2014 के दौरान खूब चर्चा में आया था, देश में उस समय कांग्रेस की मनमोहन सरकार थी और मुख्य विपक्षी दल था बीजेपी. बीजेपी ने मंहगाई को लेकर मनमोहन सरकार को जमकर घेरा, बीजेपी ने इस गाने को बार बार दोहराया और मंहगाई को लेकर खूब राजनीति हुई.

लेकिन पीपली लाइव के किरदार नत्था की तरह ही जनता के हालत नही बदले. देश की जनता ने मंहगाई से छुटकारे के लिए सरकार ही बदल दी लेकिन जनता के लिए पहले की ही स्थिति बनी हुई है. बीजेपी आने के बाद से मंहगाई कम होने की जगह उल्टा तेजी के साथ बढ़ गई.

पिछले सरकार के समय एक्टिवा गाड़ी की जो आयल टंकी 280 रूपये में फुल हो जाती थी मोदी सरकार में उस टंकी को 400 रूपये खर्च करने के बाद भी फुल नही करा पा रहे है. मंहगाई का आलम यह है कि जो सिलेंडर मनमोहन सरकार में 400 के आप पास का था वह आज 800 पर पहुंच चूका है.

मोदी सरकार के आने के बाद से ही दाल सब्जी समेत हर चीज पर अब पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे है. इस पर जीएसटी की मार और नोटबंदी ने तो जेब का पैसा ही खत्म कर दिया. जब बीजेपी विपक्ष में थी तब मंहगाई को लेकर कांग्रेस सरकार को खूब घेरती थी लेकिन आज बीजेपी के बड़े नेता चुप्पी साधे बैठे है.