अंजुम सैफी बनी सिविल जज, 6 साल की उम्र में सिर से उठ गया था बाप का साया

किसी ने सही कहा है अगर खुद पर भरोसा, कड़ी मेहनत और कुछ कर गुजरने का जुनून सर पर सवार हो तो कोई क्या कुछ नहीं कर सकता ऐसा ही कुछ एक बेटी ने कर दिखाया है. हर माँ बाप ख्वाब देखते है कि उनके बच्चे बड़े होकर उनका और उनके परिवार का नाम रोशन करें. कुछ बच्चे अपने माँ बाप के ख्वाबों को ही अपनी आखों में बसा लेते है और वह माँ बाप बहुत ही खुशनसीब होते है जिन्हें ऐसी अलौद मिलती है.

यूपी की एक बेटी ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है अपने अब्बू के ख्वाबों को अपनी आँखों में सजा कर अपनी लग्न और मेहनत से सच में बदल कर दिखा दिया है. हम बात कर रहे है अंजुम सैफी की जिन्होंने अपने पिता के ख्वाब को जज बनकर पूरा करके दिखा दिया है. लोक सेवा आयोग की पीसीएस जे-2016 परीक्षा में सफल होकर अंजुम सिविल जज बन गई है. अंजुम बेहद ही कुशलता और धैर्य के साथ अपने फ़र्ज़ को अंजाम दे रही हैं.

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मुज़फ्फरनगर की अंजुम ने बताया कि जब वह चार साल की थी तभी उनके सिर से बाप का साया उठ गया था. 1992 की बात है जब अंजुम के पिता ने शहर के बदमाशों को रंगदारी देने से इनकार कर दिया था जिसके बाद बदमाशों ने उनकी दूकान पर हमला करके उनकी गोली मा$र के ह$त्या कर दी थी.

27 साल अंजुम के पिता रशीद अहमद की बाजार में हार्डवेयर की दुकान थी वह हमेशा ही गलत करने वालों के खिलाफ खड़े रहते थे. उन्होंने बाजार में लुटेरों के खिलाफ मोर्चा खोला दिया था. बाजार में पुलिस की सुरक्षा को बढ़ाने की मांग को लेकर भी रशीद ने आंदोलन छेड़ दिया था.

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अंजुम ने बताया कि उन्हें आज भी याद है कि बचपन में उनके पिता उन्हें जज बनाने की बात कहते थे. 27 साल बाद उन्होंने पिता की ख्वाहिशों को जज बनकर पूरा कर दिया हैं. अंजुम के दिल मे इस बात की टीस हमेशा रहती है कि आज इस सपने को देखने वाले और उन्हें प्रेरणा देने वाले पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं.