गाँव का बेटा पायलट बनकर भी नहीं भूला गांव वालों को, गाँव के बुजुर्गों को प्लेन की सैर कराई, बुजुर्गों के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे

हरियाणा के हिसार में सारंगपुर के एक युवा ने वो कर दिखाया जिससे गांव के लोगों को उस पर बहुत गर्व है. आज कल आमतौर पर देखने को मिलता है कि माँ बाप अपने बच्चों को पढ़ाते लिखते और उसे गांवों से शहर भेजते है ताकि उनके बच्चे अपने सपने पुरे कर सके लेकिन कई बच्चे ऐसे भी होते है तो अपने सपने पुरे करने में अपने परिजनों को भी पीछे छोड़ देते है. लेकिन सारंगपुर के इस युवा ने न सिर्फ अपने बल्कि अपने परिवार और गांव के लोगों को भी अनमोल ख़ुशी दी है.

युवा ने दिया बुजुर्गों को अनमोल ख़ुशी का तोहफा

हिसार के एक छोटे से गांव सारंगपुर में रहने वाले विकास के सपने बहुत बड़े थे. विकास बचपन से ही पायलट बनाना चाहता था और गांव के बुजुर्गों को हवाई जहाज में सफर करना उसका सपना था. इसके बाद कड़ी मेहनत के बाद विकास पायलट बनने में सफल हो गया. इस उपलब्धि के बाद विकास ने अपने गांव के 22 बुजुर्गों को हवाई सैर कराई.

यह पूरी योजना विकास ने अपने खर्च पर की जिसमें करीबन एक लाख रूपये का खर्च आया. विकास के पिता महेंद्र ज्याणी फतेहाबाद के भूमि विकास बैंक में ब्रांच मैनेजर के तौर पर कार्यरत है. विकास ने कैलिफोर्निया से 2 साल का पायलट कोर्स किया है वह साल 2016 में पायलट बन गए थे.

कदे सपने में भी ना सोच्या था

इसके बाद उन्होंने अब 2 अक्टूबर से 4 अक्टूबर तक ग्रामीणों को सैर कराकर अपना सपना पूरा किया है. जब विकास ने बुजुर्गों को हवाई जहाज की सैर कराई को उनकी ख़ुशी का कोई ठिकाना नही है. बुजुर्ग अमरसिंह, रामकुमार, सुरजाराम का कहना है कि हमनै कदे सपने में भी ना सोच्या था कि हम हवाई जहाज में बैठैंगे.

उन्होंने कहा कि इस छौरे नै तो बुढ़ापे मै मौज करा दी. वहीं एक 70 वर्षीय महिला जैती देवी का कहना है कि अगर अब वह मर भी जाती हैं तो उनके जीवन में किसी इच्छा के बाकी रहने का कोई गम नहीं रहेगा. वह कहती हैं कि मेरे खेत में हवाई जहाज चिड़िया जैसा दिखाई देता है लेकिन असल में वह कई हाथियों से भी ज्यादा बड़ा है.

अब अगर मर भी जाऊ तो गम नही

विकास के पिता ने कहा कि हमारा बेटा बचपन से ही पायलट बनाना चाहता था. विकास को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पायलट की ड्रेस पहने हुई तस्वीर देखकर पायलट बनने की प्रेरणा मिली. तभी से उसकी आंखों में पायलट बनने का सपना तैरने लगा था जो उसने कड़ी मेहनत और लगान से आज सच में बदल दिया है.

विकास ज्याणी कहते हैं कि जब मैं पायलट का कोर्स कर रहा था तब गांव के लोग अक्सर बोलते रहते थे कि पायलट बनने के बाद हमें सैर कराएगा कि नहीं? उस समय मैंने उनसे वादा किया था कि जब मैं पायलट बन जाऊंगा तब अपने खर्चे पर आप सभी को हवाई यात्रा जरुर कराऊंगा जो अब जाकर सपना पूरा हुआ.

हवाई यात्रा करने वालों में 75 से 90 साल तक के बुजुर्ग शामिल थे. बुजुर्गों को विकास प्लेन से अमृतसर से दिल्ली ले गए इसके बाद 3 अक्टूबर को दिल्ली से लेकर अमृतसर पहुंचे. जहां बुजुर्गों को स्वर्ण मंदिर, जलियांवाला बाग और बाघा बॉर्डर घुमाया गया इसके बाद 5 अक्टूबर को सभी बुजुर्गों को लेकर वापस गांव लौटे थे.